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अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी......

Posted On: 12 Jul, 2011 Others में

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बीज अनीता जी के खाद चातक जी की और और जमीन हमारा दिमाग, उग गया नए ब्लॉग का पेड़….तो सबसे पहले तो आभार अनीता जी चातक जी और दिमाग के कीड़ों का……अब आती है मुद्दे की बात. हमें दो घटनाएँ याद आती हैं एक आँखों देखी और दूसरी जागरण में ही पढ़ी थी कुछ साल पहले. कानपूर में एक डिग्री कालेज है ‘क्राइस्ट चर्च ‘………कहते हैं ये फैशन के लिए कानपूर का प्रवेश द्वार है. शहर के सारे भवरे नयी बहार का रंग देखने यहीं आते थे…..तो साहब एक नए भवरे ने कुछ गुस्ताखी कर दी किसी कली की शान में……फिर क्या था कली के सैंडल रुपी काँटों ने जो खबर ली की कुछ दिनों तक गुलशन में भवरों की गुनगुनाहट ही नहीं गूंजी.
दूसरी घटना किस शहर की है याद नहीं……पूर्वांचल का कोई जिला था शायद…..किसी रसूखदार ने एक महिला से बलात्कार किया…..फिर जब उसकी बेटी को भी शिकार बनाना चाह तो महिला ने हंसिये की सहायता से उसे भविष्य में किसी से भी बलात्कार के काबिल नहीं रखा.
इस मंच पर पहले धारा ३७६ में बदलाव की काफी बात हुई और अब बलात्कार में जिम्मेदारी किसके सर है या नारी कितनी उन्मुक्त हो की बात हो रही है. तो साहब ३०२ में फांसी की सजा के बाद भी क्या हत्याएं रुकी? तो फिर क्या गारंटी है की ३७६ में ऐसे प्राविधान के बाद बलात्कार रुकेगा….? बंधियाकरण से उसकी वासना मर जाएगी……पर ये कोई दंड तो नहीं हुआ…….ऐसा कुछ करना है तो हाईड्रोसील करा दो…..या गनेरिया या सिफलिस और सारे डाक्टरों को ताकीद कर दो की इसका इलाज मत करना……पर सच कहूँ इससे भी फायदा नहीं होने वाला…….पापी को मारने से पाप नहीं ख़तम होता……किसी और के शरीर में जा कर फिर से प्रकट हो जाता है……नतीजा बलात्कार कम तो हो सकता है पर ख़तम नहीं.
मुझे याद है जब हमने इस घर में गृह प्रवेश किया था तो आस पास इक्का दुक्का घर ही थे……और कच्छा बनियान गिरोह का आतंक चरम पर. मेरी आयु १२ वर्ष बहन १० की और माँ….दोपहर में इतने ही प्राणी घर की रखवाली को. पापा ने सभी को बन्दूक चलानी सिखाई और साफ़ ताकीद की ‘ कोई दिवार कूद कर अन्दर आये तो मार देना……बाकि का बाद में देखेंगे’ सभी को पास की पुलिस चौकी का फोन नंबर रटाया…….एक कुत्ता भी पला…..सब मिला कर हमारी तयारी पूरी थी गिरोह के खिलाफ. इस विवरण और ऊपर की दो घटनाओ का जिक्र करने से यही मतलब है की यदि बलात्कार रोकने हैं तो पहले तो लड़कियों को खुद ही लड़ने को तयार होना पड़ेगा……काली मिर्च का स्प्रे या मिर्ची पाउडर साथ में रखना …….. आत्म रक्षा की थोड़ी ट्रेनिंग और पुरुष शरीर के कमजोर हिस्से जान लेना इतना बड़ा काम भी नहीं है की ‘हाय राम ये हमसे कैसे होगा’ कह कर टाल दिया जाये.
जरा सोचिए तो सही की भारत की जिन वीरांगनाओ की गाथा हम आज भी गाते है यदि उनके साथ भी किसी ने ऐसी हिमाकत करने की कोशिश की होती तो क्या वो भी सिर्फ कोने से सट कर आंसू बहा रही होतीं? तभी मै कहता हूँ की यदि किसी के साथ ये बुरी घटना हो ही गयी है तो लड़ो आखरी सांस तक…….नाखून दांत और जो भी प्रयोग कर सकती हो करो……फिर भी नहीं बच पाई तो बलात्कार हो जाने के बाद भी रोने के बजाये पुनः हमला करो…….पुरुष शरीर का सबसे कमजोर अंग सामने है…….ऐसा सबक दो की समाज में जिसके मन में भी ऐसा कुत्सित विचार जन्म ले तो दिमाग पहले ही रोक दे की नहीं मत करो……..कहीं लड़की तुम्हारा वैसा हाल न बना दे. यदि आपको लगता है की सब ज्यादा ही वीभत्स हो गया और आपसे नहीं हो सकता तो नारी हित की बात करना सिर्फ दिखावा है. अंत में राम धारी सिंह जी की एक अमूल्य सलाह…..
” छीनता हो स्वत्व कोई और तू त्याग ताप से काम ले; यह पाप है,
पुण्य है विछिन्न कर देना उसे, बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ है.”

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Vinita Shukla के द्वारा
July 13, 2011

एक शुभ आह्वान. नारी को सदैव अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक होना चाहिए. जूडो कराटे या आत्मरक्षा के लिए अन्य जो भी ट्रेनिंग उपलब्ध हैं, उन्हें जरूर करना चाहिए.

    anoop pandey के द्वारा
    July 13, 2011

    विनीता जी धन्यवाद….जो खुद की मदद करते है भगवान् भी उनकी मदद करता है.

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 12, 2011

http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/03/01/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%a8-2/ प्रिय अनूप जी …आदाब ! आपसे किये गए वायदे के मुताबिक अपने ब्लॉग पर आदरणीय हरिन्द्र चोधरी जी का पोस्ट किया गया लेख का लिंक आपको दे रहा हूँ …. उम्मीद करता हूँ की इससे आपको जरूर कुछ न कुछ सहायता जरूर मिलेगी ….. धन्यवाद

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    आपने वादा निभाया है तो धन्यवाद से काम नहीं चलेगा……आभार प्रकट करता हूँ. कोशिश रहेगी की चौधरी जी के ब्लॉग से ज्यादा से ज्यादा लाभ अर्जित कर सकूँ

chaatak के द्वारा
July 12, 2011

स्नेही अनूप जी, बीज और खाद दोनों का इस्तेमाल बखूबी किया है आपने| आपने प्रतिकार के जो तरीके बाताये हैं उन्हें अमल में लाने से महिलाएं कभी पीछे नहीं हटती हैं| आपकी सुझाई तरकीबें अच्छी हैं और कारगर भी| इस विषय पर लिखने का मेरा ध्येय पुरुषों के दिलो-दिमाग से इस बीज को ही नष्ट करना है ताकि भावी पीढ़ी में कोई नया राक्षस न पैदा हो| अच्छे लेख पर बधाई!

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    चातक जी खाद आपकी थी तो बधाई भी आपको ही मिलनी चाहिये. मै तो इस मुद्दे में कूदता ही नहीं…….पर कमाल आपके ब्लॉग का की रहा ही नहीं गया……..

Anita Paul के द्वारा
July 12, 2011

अनूप जी, शायद आपको ये लगा होगा कि ऐसा लिख कर आप पूरी नारी जाति का समर्थन प्राप्त कर लेंगे. लेकिन जो भी लिखा आपने अच्छा लिखा. कम से कम आपने नारी समुदाय का मजाक बनाने की बजाय संबल की बात की. काश, अन्य मर्दों को भी आपसे प्रेरणा मिल पाती तो कितना अच्छा होता. निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं आप.

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    अनीता जी पूरी नारी जाती का प्रतिनिधित्व न तो आप करती हैं ना ही ये मंच. मेरे ब्लॉग जयादातर स्वान्तः सुखाये होते हैं. और कोई चुनाव तो लड़ना है नहीं की समर्थन की सोच में सर के बाल कम कर लूँ….. हमें तो बस एक ही नारी ( हमारी होम मिनिस्टर ) का समर्थन मिलाता रहे बहुत है. और बार बार आप ‘नारी समुदाय ‘ तथा मर्दों की बात जिस हक से उठा लेती है की हम सोचने को मजबूर हो जाते हैं अगर भगवान् ने आपको महिला की बजाये पुरुष बनाया होता तो? यदि तब भी आपकी यही सोच होती तो आप भारत की महिलाओ पर तालिबानों के नियम लगाने की हिमायत करतीं. फिर भी बधाई का पात्र आपने समझा हमें इसके लिए धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
July 12, 2011

प्रिय अनूप जी ….नमस्कार ! अनीता जी के क्या कहने वोह तो इस मंच की “बवंडर गर्ल” है जिसकी चपेट में आप और मैं ही नहीं बल्कि जागरण के संपादक गण भी आये हुए है …. आपके पिछले लेख में आपकी एक बात मन को अखरी हम लोग चाहे संगीतकार नहीं है लेकिन फिर भी कोई गाना सुन कर आसानी से काह देते है की यह अच्छा है या फिर किस स्तर का और किस श्रेणी का ….. अब आगे से :) :( ;) :o 8-) :| भ्रमर जी के साथ न्याय कीजियेगा ….

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    राज कमल जी नमस्कार. अनीता जी के लिए कुछ न कहलवाएं यही अच्छा……. जहाँ तक भ्रमर जी की बात है तो आपके लिखने से पहले से ही इस बात का फैसला हम मन ही मन ले चुके थे…….जल्द ही आप उनके अगले लेख पर हमारी प्रतिक्रिया भी देखेंगे.

Santosh Kumar के द्वारा
July 12, 2011

अनूप जी , सार्थक लेख …. बधाई

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    धन्यवाद संतोष जी

Alka Gupta के द्वारा
July 12, 2011

अनूप जी , मुझे लगता है कि पुरुष की इस घृणित सोच व कृत्य को समूल नष्ट तो नहीं किया जा सकता है लेकिन अगर पीडिता अपनी लड़ाई साहस और इस भावना के साथ लड़े कि अब आज के बदलते समय में नारी अबला नहीं सबला है तो कुछ सीमा तक यह शायद कम हो ! अच्छा आलेख !

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    अलका जी आदमी को पशु बनते समय नहीं लगता…..कई महिलाएं भी हैं जो लड़कियों को व्यापार के गर्त में डालती हैं. खैर सोच नहीं मरती…..और इतनी पुरातन सोच को ख़तम करना आसान नहीं है. बदला और संघर्ष यदि न्याय न भी दिला सका तो भी मानसिक शांति तो दिला ही सकता है. नारी किसी भी मामले में नर से कम है ये मै कदापि नहीं मन सकता, और बलात्कार किसी भी नारी के अंतस की हत्या है…..और उसके बाद की न्यायलय की प्रक्रिया मानसिक त्रास….तभी कहता हूँ की वहीँ पर फैसला कर दो…….न्याय की भीख मत मांगो….बचपन में जो नवदुर्गा मान कर पूजी गयी वो आज स्वत्व की रक्षा के लिए स्वयं दुर्गा बनी तो हर्ज कैसा?

Tamanna के द्वारा
July 12, 2011

अनूप जी, आपका कहना उचित है, जब तक हम अपने लिए लड़ने की हिम्मत नहीं करेंगे, तब तक हमें अत्याचारों से मुक्ति नहीं मिल सकती, आखिर कब तक दूसरे न्याय करेंगे,इस भाव के साथ जिया जा सकता हैं. http://tamanna.jagranjunction.com/2011/07/09/homosexuality-and-gay-rights-in-india/

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    जीवन इसी भाव से जिया जाता है. महिलाओ को वोट का अधिकार, रंग भेद नीति और दलित उद्धार सभी के लिए लड़ना पड़ा था. पर इस लड़ाई को पर्सनल ग्राउंड पर लड़ना होगा. जो सलाह मैंने ब्लॉग में लिखी है वही मै अपनी किसी भी परिचित को भी दूंगा. आत्मरक्षा किसी के लिए भी प्रथम धर्म है चाहे किसी भी कीमत पर करनी पड़े. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद….

nishamittal के द्वारा
July 12, 2011

अनूप जी आपका आलेख पढ़ा यदि पुरुष इस घिनौने कर्म से पूर्व अपनी माँ,बहिन या पत्नी के लिए एक सेकेण्ड सोच ले तो सम्भवतः स्वयं ही कदम पीछे हट जायेंगें ऐसा मेरा विचार है,परन्तु नारी स्वयं बी ही दोषी है,यह मैं मानती हूँ,कृपया समय मिलने पर मेरा आलेख “रोती पीडिता और खिलखिलाता बलात्कारी अवश्य पढ़ें”

    anoop pandey के द्वारा
    July 12, 2011

    निशा जी लोगों ने तो अब इन रिश्तों को भी कलंकित कर रखा है. यदि बचना है तो बचाव के इंतजाम भी खुद ही करने होंगे. आपका आलेख अवश्य पढूंगा. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद


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