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विधान सभा में अश्लील वीडियो – Jagran Junction Forum

Posted On: 14 Feb, 2012 Others में

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जो पकड़ा जाये वो चोर बाकी सब साहूकार………….अब ये उन मंत्रियों का दुर्भाग्य की वो पकडे गए……..थोडा सा गम खा लेते…पर बोरियत मिटाने को कुछ तो चाहिये. हम समझ सकते है की विधान सभा में विधायकों को उसी प्रकार नींद आती होगी जैसे की कभी हमें क्लास रूम में आती थी और अब कांफ्रेंस में आती है. हम तक क्लास में पत्रिका देख कर समाधान निकालते थे और वो कुछ जयादा ही बड़ा काम कर रहे थे. तो साहब लोग अगर दस से बारह साल के बच्चे मोबाईल पर ये सब देख सकते हैं तो माननीय जी की उम्र तो पैतीस से जयादा ही थी , और यदि कोई उनके इस वीडियो देखने पर सवाल उठाता तो मै ये कहूँगा की किसी पर एक ऊँगली उठाने पर बाकी चार ऊँगली आप पर भी हैं. हममे से कितने है जिन्हों ने कोई ऐसी फिल्म देखी नहीं या फिर स्टोर नहीं की?
बात ये जरूर है की काम के वक़्त मटरगस्त्ती कर रहे थे माननीय जी…..ये तो गलत था पर हम सभी अपने आफिस में कितनी देर वास्तव में काम करते है ये गौर करने की बात है. यदि आप नैतिकता की बात करते हैं तो बिग बोस में भी पोर्न अभिनेत्री का भारत ने खुले दिल से स्वागत किया था. दो अर्थो के संवादों और गानों की गिनती ही नहीं है, और विज्ञापन के वयस्कों के बारे में होने को ले कर अभी अभी एक ब्लॉग दखा था इसी मंच पर. साइट्स की तो भरमार है, मसाज पार्लर और एस्कोर्ट के विज्ञापन सभी समाचार पत्र देते हैं तब नैतिकता कहा जाती है?
कुल मिला कर कहना ये है की ये राजनीति का नहीं भारतीय समाज का अधोपतन दर्शाता वाकया है. जब विधानसभा लोकतंत्र के मंदिर ही नहीं रहा तो अश्लील वीडियो देखना एक असाधारण और अक्षम्य अपराध हो ही नहीं सकता. और दंड भी तो कम नहीं मिला उनको. मंत्री पद जाना छोटी बात है पर ऐसी बात समाचार चैनल में आने के बाद घर वालो से तो दूर अपने वाहन चालक से नजरे भी कैसे मिला पाए होंगे….अगले चुनाव में जनता से भी नजरे मिलनी है. और राजनीति के नैतिक अधःपतन का ये उदाहरण तो वैसा ही है की बड़े डाकुओं को माफ़ी और पाकेटमार को फासी . बलात्कार और हत्या के वांछित बाहुबली का विशेषण पाते है उनका क्या? शायद तिल का ताड़ बन रहा है मेरे हिसाब से.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2012

आदरणीय पाण्डेय जी, सादर ! अगर आप खुद को इन माननीयों द्वारा अपेक्षा की जानेवाले कर्तव्यों के समकक्ष पाते हैं, तो आपकी बात सही है, परन्तु हम आम जनता हैं, हम संसद में बैठे भारत की तकदीर लिखने वाले माननीय नहीं हैं. उनकी अपेक्षा हमारी जिम्मेवारियां सीमित हैं, अपने कथन पर आप स्वयं पुनर्विचार करें !

    anoop pandey के द्वारा
    May 21, 2012

    आदरणीय शशि जी… सादर आभार मेरा भी मानना है की मेरे तर्क गलत हैं…पर आज के नेता ऐसे तो नहीं है की जिनसे हम नैतिकता की प्रेरणा लें. और देश में अन्य मुद्दे इतने बड़े है की उनके सामने इस मुद्ददे की कोई जगह ही नहीं है तथा इसे कुरेद कर समाज या रास्त्र का भला हो ऐसा भी संदिग्ध है. छोटे के कारन बड़े मुद्दों से ध्यान न भटक जाये बस इतना ही भाव था.


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