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करोडपति बनने का आखिरी मौका ....... आई पी एल फिनाले

Posted On: 28 May, 2012 Others में

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मेहारबान कदरदान आफ हिन्दुस्तान….
चुन्नू मुन्नू , भैया भाभी और पीछे खड़ा जवान…
सब को मेरा सलाम…..
कब तक रोज़ बस की लाइन में धक्के खाओगे
बीवी को नयी साडी के लिए कितना इंतज़ार कराओगे
आप के लिए बस आपके लिए ये इस्कीम लाया हूँ,
आज नहीं सुनोगे तो कल पछताओगे.
तो साहिबान एक लगाओ पांच ले जाओ दस लगाओ पचास ले जाओ,
सीधा सीधा खेल है बाबू न घोटाला न भ्रस्टाचार,
ज्यादा महीन अगर है बुद्धि तो ले जाओ सैकड़ो हज़ार.
आखिरी मौका है साहिब फ़ाइनल का गेम है,
रुपये तुम ले जाओ बाबू , टीम को चाहिये बस फेम है……..
तो बाबू लगाओ लगाओ…..चाहे जिस पर लगाओ
धोनी नहीं पसंद तो बाबू गंभीर पे लगाओ.
एक का पांच में भला नहीं है…..थोड़ी अकल लगाओ तो.
एक का पच्चीस दे दूंगा बाबू स्कोर अगर बताओ तो…

ऐसी बहुत सी स्कीम है बाबू पास बैठ कर सुन जाना….
मैच ख़तम होते पर बाबू तुम भी करोडपति बन जाना……

भाई लोगो को राम राम…..ये तुक बंदी तो बस ऐसे ही लिख दी सोचा अगर पुराना जमाना होता तो लोग आई पी एल पर सट्टा कैसे लगवाते. इस बार का आई पी एल मजेदार रहा…समाचार वाले भाइयों को खबर के लिए ज्यादा माथा पच्ची नहीं करनी पड़ी. विवाद भी खूब उठे……पर साहिब हमें उससे क्या….परिवार और नौकरी वाले लोग है. इन सब से टाइम मिले तो कुछ खेल का खेला भी देखते. पर फिर भी इतना तो पता है की आई पी एल ने भारत के सुपर हाई क्लास की सच्चाई सबके सामने खोल कर रख दी. मैच के बीच शराब…….बाद की पांच सितारा पार्टी , कभी कभी की रेव पार्टी , शराब शबाब और पैसा…………खेल तो बस बाहर का मुलम्मा है. पर एक बात कभी समझ में नहीं आई; की सारी टीम घाटे में फिर भी उनके मालिक; जो की व्यवसायी है; खेल से इतना प्रेम करते हैं की लगातार ५ सालों से घाटा सहे जा रहे है. ऐसा क्या है ? और अगर ऐसा कुछ है तो बाकि खेल क्यों नहीं इस तरह होते हैं? खैर ढोल में कुछ भी पोल हो हमें क्या ? उनका पैसा है चाहे जैसे इस्तेमाल करें और घाटा चाहे जहाँ से पूरा करें . मेरी परेशानिया तो ज्यादातर मेरे मोहल्ले से ले कर मेरे शहर तक ही रहती हैं.
एक शाम गली के नुक्कड़ पर कुछ नयी उम्र के लडको में झगडा हो रहा था , बुला कर पूछा तो देनदारी की बात थी पर रकम सुन कर होश उड़ गए, ग्रेजुएशन के दूसरे साल में पढने वाले की देनदारी बीस हजार? जहा तक मै लड़के को जानता था उसमे कोई व्यसन भी नहीं था तो फिर और कुरेदना पड़ा………..पता लगा की रकम सट्टे की थी. उसने किसी टीम पर सट्टा लिखाया था और हार गया अब पैसे किधर से दे? और अन्दर गया तो पता लगा की लगभग लगभग गली के सभी लड़के खेलते हैं और उनमे से एक बुकि का काम करता है……….आठ प्रतिशत मिलता है उसे……बड़े फक्र से बता रहा था अपनी लिमिट पचास हज़ार. और जाना तो लगा हर गली का ये ही हाल है………..अब फिर शहर का क्या होगा. कितनी रकम? अंग्रेजी की एक कहावत है the house always wins बाकी सभी हारते हैं . और जब किसी सट्टा किंग के पास इतना सारा पैसा आ जायेगा तो क्या वो मैच का रुख नहीं बदलने को चाहेगा किसी के घाटे को कम करके या उसे फायदा करवा कर ? तो फिर जो हम देख रहे है क्या वो सच में खेल है या फिर  WWE की तरह इंटरटेनमेंट?
पर मेरी परेशानी ये है की इन नादान लडको का क्या? घर से पैसा मांग नहीं सकते क्योकि बताने की हिम्मत नहीं है और खुद के पास हैं नहीं, पैसे नहीं दिए तो गुंडे छोड़ने वाले नहीं, अब ये क्या किसी गलत रस्ते नहीं जाने वाले? मैंने जिन्दगी में अगर मायावती जी को कभी दिल से दुआ दी है तो तब जब की उन्होंने उत्तर प्रदेश में लाटरी बंद की थी, अब ये क्या है? तो मित्रों अगर आई पी एल मेरे मोहल्ले के लडको को अपराधी बना है फिर तो ऐसे खेल से मेरी तौबा. अच्छा है आज आखिरी मैच है.

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
May 30, 2012

अनूप जी , खेलों में लगए जाने वाले सट्टा बाज़ार के बारे में आपने बहुत ही अच्छा लिखा है और आजकल बच्चे भी खेलों में सट्टा लगाने लगे हैं और फिर आगे आने वाले समय में यह कहाँ से कहाँ तक पहुँच जायेगे अपने भविष्य को ही दांव पर लगाये हुए हैं.इस आलेख के माध्यम से एक बहुत ही गंभीर व विचारणीय विषय को उठाया है……

    anoop pandey के द्वारा
    May 31, 2012

    आदरणीय अलका जी, प्रतिक्रिया के लिए कोटि कोटि धन्यवाद

satish3840 के द्वारा
May 29, 2012

अनूप जी नमस्कार / जान कर काफी आश्चर्य हुआ कि गली में भी खेलो पर सट्टा लग रहा हें / इनकम टेक्स में घुड दौड़ की आय के बारे में तो सूना था पर अब खेलों में भी ये सरेआम हो रहा हें / लगता हें ये खेल न होकर एक जीता जागता सट्टा बाजार हें /

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    सतीश जी सादर अभिवादन, सट्टा परमब्रह्म की तरह है ‘ कण कण में व्याप्त’ मेरी न माने तो किसी सटोरिये का इंटरव्यू ले कर देख लीजिये.

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 28, 2012

आदरणीय अनूप जी ….. सादर अभिवादन ! सट्टा लगाने में आजके बच्चे इस हद तक चले गए है जान कर हैरानी हुई ….. जहाँ पर +जिस भी गेम पर बाजार हावी हो जाता है फिर वहां पर व्यापारिक बुद्दी ही काम करती है जिसको की सिर्फ अपने फायदे से ही मतलब होता है फिर चाहे वोह किसी भी तरह से क्यों ना हो ….. भली करे करतार बुकियो की नजर बुरी जय श्री कृष्ण जी :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    जय श्री राधे राज कमल जी, बच्चे किस हद तक गए है यदि ये जानना है तो अशोक जी को दिए गए उत्तर पर नजर मार लें. समाज अन्दर अन्दर ही खोखला होता जा रहा है. ये ब्लॉग तो बस एक चेतावनी भर है.

vikramjitsingh के द्वारा
May 28, 2012

अनूप जी…नमस्कार…. सत्य कहा आपने……यही हो रहा है….. ऊपर से तुकबंदी का तड़का……कमाल की लेखन शैली…. धन्यवाद…..

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    विक्रम जी सादर अभिनन्दन; आपका प्रोत्साहन प् कर छाती ढाई गज की हो गयी. धन्यवाद.

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 28, 2012

नमस्कार अनूप जी .. सच्चाई तो मिडिया से सब के सामने आ गयी है .. पर हाँ अगर पढाई करने के समय अगर आज गली महल्ले के में नयी पीढ़ी इस क्रिकेट के भुत से बर्बाद हो रही है … तो बहुत ही भयानक बात है … इसका हर स्तर पे विरोध होना चाहिए .. बहुत ही रोचक प्रस्तुति … बधाई आपको

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    प्रस्तुति आपको अच्छी लगी ये जान कर हमें भी अच्छा लगा…….हम तो अपने स्तर पर विरोध कर ही रहे है……आप भी अपने स्तर से शुरू कर दीजिये…..एक दिन सभी के विरोध उस स्तर तक आ जायेंगे की ये बुराई उनको मजबूरन बंद करनी पड़ेगी. प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद्.

yogi sarswat के द्वारा
May 28, 2012

बहुत सही खाका खेंचा है आपने , IPL में मची सट्टेबाजी का ! बढ़िया लेखन शैली !

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    प्रोत्साहन के लिये धन्यवाद् योगी जी.

vasudev tripathi के द्वारा
May 28, 2012

अनूप जी, ipl कालाबाजारी का एक अड्डा बन चूका है और कुछ नहीं…!! सट्टे से लेकर ब्लैक मनी सब कुछ चलता है यहाँ… अभी हमने दो समय की रोटी तो हर घर तक पहुंचा नहीं पाई, ipl पर अपनी आधुनिकता की डींग हांकते हैं..!! कैसी विडम्बना है!!

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    वासुदेव जी भगवान् का नियम है की सुबह पूरब की ओर देख कर करो……पर हम है की आधुनिकता के चक्कर में पश्चिम को देख कर दिन शुरू करते हैं. ऐसे में संस्कृति दक्क्षिण मुखी हो रही है. प्रतिक्रिया हेतु आभार.

Mohinder Kumar के द्वारा
May 28, 2012

अनूप जी, इस दुनिया में सब कुछ है… जिसको जो चाहिये होता है चुन कर हासिल कर लेता है. इसमे खेल का दोश नहीं मानव की सोच ही कुछ ऐसी है. अमीर बनने के शोर्ट कट आदमी को कभी ऊंचाई तो कभी खाई में धकेल देते हैं. लिखते रहिये

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    मोहिंदर जी प्रोत्साहन के लिए आभार, शोर्ट कट तो सभी लगाते है पर ये कुछ ज्यादा ही शोर्ट है.

akraktale के द्वारा
May 28, 2012

अनूप जी सादर नमस्कार, आपके लिखने का अंदाज बड़ा प्यारा लगा. पढने के उत्साह दो गुना हो गया. सच लिखा है आपने आय पी एल में कुछ भी हो किन्तु इन बच्चों का क्या? वाकई समस्या गम्भीर है.कई लडके डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. कुछ को मजबूरीवश घर में बताना पड़ता है किन्तु तब तक चुकाए जाने वाली रकम दो गुने से अधिक हो जाती है. और इस हकीकत से आपको शायद आश्चर्य हो की क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिस पर वर्ष के ३६५ दिन सट्टा लगता है. हम सिर्फ IPL को दोषी ठहरा कर क्या कर लेंगे. हाँ मगर देश में जब ये खेल होता है तो इस प्रकार के कारोबार में तेजी अवश्य आ जाती है. ऐसी गतिविधियों से बच्चों को बचाना भी हमारा फर्ज है.

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    आदरणीय अशोक जी, प्रणाम, कुछ दिन पहले एक चेन स्नेचर से मुलाकात हुई जो की अपने अपराध के मूल में उसकी देनदारी को वजह बता रहा था……….लड़का अच्छे घर का था. अब ये सब हमारी आज की पीढ़ी को कहा ले कर जा रहा है वही चिंता की वजह है.

jlsingh के द्वारा
May 28, 2012

आदरणीय पांडे साहब, नमस्कार! आप भी तो ऐसा आलेख तब लिखते हैं जब सब कुछ हाथ से निकल गया होता है ! अगर आप कुछ दिन पहले यह लेख मंच पर डालते तो शायद मैं भी करोड़पति या रोडपति बन गया होता ! चलिए अच्छा है हम सब साथ रहेंगे! बहुत ही सुन्दर, चुटकीला ब्यंग्य!

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    आदरणीय जवाहर जी, सादर नमन, हाथ से अभी भी कुछ गया नहीं है बस खेल का मैदान बदल गया है. सट्टा तो सदाबहार धंधा है. मौके अभी भी बाकी है.बस अगर करोडपति बन गए तो साथ साथ वाली बात याद रखियेगा.

nishamittal के द्वारा
May 28, 2012

अनूप जी खेलों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर आपने बहुत अच्छा लिखा है,इसके लिए खेल दोषी नहीं सम्बन्धित अधिकारी,कार्पोरेट्स और दोषी खिलाड़ी दोषी हैं.वैसे केवल क्रिकेट नहीं अंततराष्ट्रीय स्तर पर सभेई बड़ी प्रतिस्पर्धाओं में ये भ्रष्टाचार है,परन्तु शायद क्रिकेट और फ़ुटबाल इसके चरम हैं.

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    आदरणीया निशा जी आपसे पूर्ण सहमती.

dineshaastik के द्वारा
May 28, 2012

भाई मेरा मानना है कि आई पी एल  में इतना पैसा है कि उससे कोई भी सरकार बन सकती है और कोई भी गिर सकती है। राजीव शुक्ला इसका उदाहरण  हैं। आई पी एल  का हर  खिलाड़ी, कर्मचारी एवं अधिकारी जानता है कि आई पी एल  में अनाप सनाप पैसा है। लालू जैसे लोंगों को उसमें हिस्सेदारी न  मिलने से उनका ची पो करना स्वाभाविक  है। खेल  में नेताओं के होने का अर्थ  है भ्रष्टाचार। भ्रष्टाचार नेता का पर्याय बन गया है। हम  तो भाई तमाशा देखने वाले वोटर हैं। केवल  लिख  सकते हैं कर कुछ  नहीं सकते।

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    दिनेश जी सादर नमन, करने को तो एक ब्लॉग भी बहुत कुछ कर सकता है वोट तो बहुत बड़ी चीज़ है. हाँ पर खेल में जिसने जिसने भी पैसे लगाये वो आये कहा से ये पता लगाना बहुत जरूरी है.

चन्दन राय के द्वारा
May 28, 2012

मित्र , खेल किसी को अपराधी नहीं बनाता, अपराधी बनाती है हमारी सोच , हमारी कामचोरी , हमारी गैरजिम्मेदारी , यह सत्य है की सट्टे के रोग से अब खेल ग्रस्त हो चुके है , बढ़िया आलेख

    anoop pandey के द्वारा
    May 30, 2012

    मित्र चन्दन जी नमस्कार, सट्टे से खेल ही नहीं और भी बहुत सी चीज़ें बीमार हैं…….शोध अभी भी जारी है. देखते है क्या निकल कर आता है. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्.


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