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अँधेरे और चाँद की कश्मकश

Posted On: 3 Jun, 2012 में

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चार दिनों की जीत की कीमत ग्यारह दिन वनवास;
चाँद लिए लड़ता है तारों की बारात.

जीवन की परिभाषा, वेदों का है सार,
चाँद सिखाता धर्म विश्व को, मर कर कितनी बार.

तुम भी चुप मत रह जाना; कहीं देख कर अंधियारा,
जल जाना खुद दीपक बन कर, अमर रहेगा नाम तुम्हारा.

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
June 6, 2012

आदरणीय अनूप जी, सादर ! “चार दिनों की जीत की कीमत ग्यारह दिन वनवास; चाँद अनवरत लड़ता लेकर तारों की बारात. जीवन की सार्थक परिभाषा, वेदों का है सार, चाँद सिखाता धर्म विश्व को, मर कर कितनी बार. चुप मत रहो, मुखर हो बोलो, अगर दिखे अंधियारा, दीपक बनो, जलो, लेंगे सब हरदम नाम तुम्हारा.” . सुन्दर, सार्थक सन्देश ! सादर !

    anoop pandey के द्वारा
    June 6, 2012

    आदरणीय शशि जी, सादर नमन, आपने सन्देश का सम्पादन करके उसमे चार चाँद और लगा दिए. पर मै ठहरा अभियंता, हथोड़े की ठन ठन में भाषा का लोप कब हो गया पता ही नहीं चला. हिंदी को कागज़ पर लिखे सालों बीत गए. फिर भी सन्देश अच्छा लगा यही बहुत है.

akraktale के द्वारा
June 4, 2012

अनूप जी नमस्कार, चाँद को सामने रखकर सीख लेने के लिए लिखी गयी सुन्दर रचना. कुछ विस्तार दिया होता तो और भी अच्छा होता. बधाई.

    anoop pandey के द्वारा
    June 5, 2012

    अशोक जी रचना ही लिख गयी यही क्या कम है……ये हमारी विधा नहीं है……बस तुकबंदी मिली तो जल्दी से उतर दी…….कुछ मार्गदर्शन दें शायद कुछ हो जाये. सादर आभार.

allrounder के द्वारा
June 4, 2012

नमस्कार भाई अनूप पाण्डेय जी, कविता के जरिये अच्छी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए बधाई !

    anoop pandey के द्वारा
    June 5, 2012

    नमस्कार सचिन जी, कविता आपको अच्छी लगी हमारा काम सिद्ध हुआ.

मनु (tosi) के द्वारा
June 3, 2012

बेहद उम्दा!!! आदरणीय  अनूप जी बहुत ही बढ़िया … चार दिनों की जीत की कीमत ग्यारह दिन वनवास; चाँद लिए लड़ता है तारों की बारात.  सादर

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद आदरणीय पूनम जी, सादर आभार……….

चन्दन राय के द्वारा
June 3, 2012

अनूप जी , तुम भी चुप मत रह जाना; कहीं देख कर अंधियारा, जल जाना खुद दीपक बन कर, अमर रहेगा नाम तुम्हारा. कम शब्दों में बड़ी दवा सी आपकी पंक्तियाँ बेहद सुन्दर

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    मित्र चन्दन, हमारी पंक्तिया आपको अच्छी लगी ये जान कर हमें भी अच्छा लगा. सादर धन्यवाद्.

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 3, 2012

हमने भी करनी है अब मरने की तैयारी होना है अमर हमको ले लो गारंटी हमारी मर मिटेंगे किसी कन्या पर “आज मर मिटने की है ठानी निकले है सिर पर बांधे कफन कहा था उसके बाप ने बच्चू लाल अगर आईन्दा नजर आये इस गली में तो कर दिए जाओगे जिंदा दफन :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P जय श्री कृष्ण जी

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    जय श्री राधे राज जी, बात तो सही है , अमर आप जरूर से हो जायेंगे और आने वाले लोक सभा चुनाव में नया मुद्दा भी बन जायेंगे. कन्या नहीं मिली तो न सही…… उसकी गली का नाम बदलवा कर हम हम सभी जागरण व्यंग सम्राट राज कमल कालोनी रखवायेंगे. इस प्रकार आप प्रेमी प्रेमिका इतिहास में अमर हो जायेंगे.

jlsingh के द्वारा
June 3, 2012

लेकिन पांडे जी, ऐसी भी क्या जल्दी थी जगाकर खुद चले गए ! इतनी सारी बातें चंद पंक्तियों में कह डाली ……! नमस्कार जल्दी आइये! उजाला हो चुका है!

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    जवाहर जी सुप्रभात……… हम कोई वक़्त नहीं है हम दम , जब बुलाओगे चले आयेंगे. खैर ये तो हो गयी मस्ती, पर हम छोड़ कर गए नहीं थे बच्चे जाग गए थे इस लिए थोडा व्यस्त हो गए थे. रही बात उजाले की तो देखते है जंतर मंतर से कोई उजाला आता है या नहीं. वैसे तो हम भी लखनऊ विधानसभा के गेट संख्या तीन पर जा रहे है बड़ी आशा के साथ.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 3, 2012

कम पंक्तियों में बहुत सुन्दर कविता,अनूप जी.

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    राजीव जी सुप्रभात, हमारी तुकबंदी को आपने कविता का नाम दिया यही क्या कम था, आपको पसंद भी आई तो सोने पे सुहागा हो गया.

nishamittal के द्वारा
June 3, 2012

सार्थक सन्देश अनूप जी.

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    आभार आदरणीय निशा जी.

dineshaastik के द्वारा
June 3, 2012

अनूप जी बहुत  सुन्दर, कम  पंक्तियों में बहुत ही सुन्दर संदेश…….

    anoop pandey के द्वारा
    June 3, 2012

    आदरणीय दिनेश जी बहुत बहुत धन्यवाद.


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