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परदेस से पिया को पाती.....

Posted On: 5 Jun, 2012 Others में

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इन ऊचे ढलानों से हवा जो उतरती है,
कभी कभी रुक कर मुझसे बातें भी करती है.

कहती है हाल तुम्हारा ; गीत नए सुनाती है;
हौले से मेरे कानो में ‘ मिस यू डार्लिंग’ कह जाती है.

गहरी काली चूनर ओढ़े ; सांझ घनेरी आती है;
आँखों में सपने भरती है; थपकी दे के सुलाती है.

सुबह सुबह सूरज की लाली नए अरमान जगाती है;
झुलसाती गर्मी अपने संघर्षों की याद दिलाती है.

इतना अपनापन है सखी यहाँ ; फिर भी आँखें भर आती हैं,
सुख चाहे जितना भी हो पर याद तुम्हारी आती है.

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 9, 2012

मेरी सजनी गई है रंगून वहां से किया है मेल मिस यू राजकमल तुम्हारी याद सताती है सोने से पहले भी और सोने के बाद भी सताती है अच्छी रचना लेकिन बेहतरीन नहीं :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P जय श्री कृष्ण जी

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    जय श्री राधे राज कमल जी…….बेहतरीन तो हो जाती यदि सोने के बाद वाला आइडिया आपने पहले दे दिया होता. इस प्रकार गलती हमारी नहीं आपकी है.

akraktale के द्वारा
June 6, 2012

प्रिय का सन्देश हवाओं में बहा लाती सुन्दर रचना अनूप जी. बधाई.

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    धन्यवाद अशोक जी.

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 5, 2012

कहानिया सुनाती है पवन आती जाती एक है दिया और एक है बाती ऐसा लगता है की बात कुछ ज्यादा पुराणी नहीं है इसलिए घाव मीठी -२ टीस रूपी दर्द दे रहा है :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    राज जी बात पुरानी है और नहीं भी……….घाव भरने से पहले ही फिर उभर आता है…….अब तो दिया बाती साथ में है और प्रकाश भी दे रहे हैं. फिर भी रोटी का जुगाड़ घाव उभार देता है.

nishamittal के द्वारा
June 5, 2012

आपकी रचना अच्छी लगी अनूप जी.बधाई.

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    धन्यवाद निशा जी.

चन्दन राय के द्वारा
June 5, 2012

अनूप जी मित्रवर , आपकी कविता को पढ़कर इक बात तो तय हो गई ,की आप उस प्रियजन को बेहद प्रेम करते है तभी आप हवा से उसके अफ़साने सूना करते हैं

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    मित्र दुखती रग पर हाथ मत रखो…………

ajay kumar pandey के द्वारा
June 5, 2012

आदरणीय अनूप पाण्डेय जी सर्वप्रथम पुत्र प्राप्ति की बधाई स्वीकार करें मेरा येही आशीर्वाद है आपके पुत्र को की आपका पुत्र बड़ा होकर आपकी ही तरह एक अच्छा लेखक बने धन्यवाद

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    आदरणीय अजय जी , धन्यवाद………पुत्र तो लेखक बनाने से रहा………क्यों की वो तो हम भी नहीं हैं. बस आप सब के आशीष से अच्छा पुत्र बन जाये तो जीवन सफल हमारा.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 5, 2012

सुन्दर कविता,अनूप जी.आपकी कविता पढ़ते समय दिवंगत जगजीत सिंह की वह गजल याद आ गई….. ‘हम तो हैं परदेश में,देश में निकला होगा चाँद’.

    anoop pandey के द्वारा
    June 12, 2012

    राजीव जी धन्यवाद………..विरह के गीत तो ऐसे ही होते हैं.

dineshaastik के द्वारा
June 5, 2012

आदरणीय अनूप जी प्रकृति का सुन्दर मानवीयकरण, अंतिम पंक्तियाँ बहुत ही खूबसूरत  बन पड़ी हैं। इतना अपनापन है सखी यहाँ ; फिर भी आँखें भर आती हैं, सुख चाहे जितना भी हो पर याद तुम्हारी आती है.

    anoop pandey के द्वारा
    June 6, 2012

    आदरणीय दिनेश जी ; सादर नमन, अंतिम पंक्तियों के लिए ही सारी पंक्तिया लिखी.

jlsingh के द्वारा
June 5, 2012

आदरणीय अनूप जी, नमस्कार! यह क्या आदिकवि कालीदास का नया संस्करण है! आसाढ़स्य प्रथम दिवसे मेघाच्छन्न नभे….. इतना अपनापन है सखी यहाँ ; फिर भी आँखें भर आती हैं, सुख चाहे जितना भी हो, पर याद तुम्हारी आती है. अपनी धरती अपने लोगों की याद आना बहुत अच्छी बात है … मन करुणा से भर जाता है … जानने की इच्छा हो चली महोदय, यह कविता कहाँ रहकर लिखी गयी है? सादर …

    anoop pandey के द्वारा
    June 6, 2012

    आदरणीय जवाहर जी. सादर प्रणाम, यह तुकबंदी हमने सन २००२ में लिखी थी जब हम पूने में कालेज में थे……ये हमारे कई हज़ार प्रेमपत्रों में एक था……..पहला सेमेस्टर घर से बाहर रहना , फिर प्रिय की याद, बस कुछ कागज़ पर बन निकला. प्रतिक्रिया हेतु आभार.


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