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आलोक का प्रश्न और बाबा आमटे का उत्तर

Posted On: 13 Jun, 2012 Others में

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उपरोक्त शीर्षक चौदह फरवरी सन सत्तानबे के जागरण में छपे अरुण शौरी जी के संपादकी लेख से लिया गया है. आज फिर से इस लेख की याद आ गयी……….घटना छोटी सी है , शहर के प्रतिष्ठित वकीलों में से एक शुक्ल जी के एक मात्र पुत्र का सड़क दुर्घटना में निधन. अभी दो वर्ष पहले विवाह हुआ था. शुक्ल जी नगर में बड़े धार्मिक व्यक्ति माने जाते हैं ,भव्य मंदिर निर्माण और वो भी एक बड़ी फैक्ट्री से मंदिर की जमीन छुड़ा कर जिसके लिए की उन्हें कई लोगो को लाम बंद करना पड़ा. दान इत्यादि भी अच्छा करते हैं. पर प्रश्न ये है उन पे उनकी पत्नी और सबसे ज्यादा उनकी पुत्र वधु पर इस आकस्मिक वज्रपात का कारण क्या था? जैसा की वो खुद भी पूछ लेते हैं सांत्वना देने आये हुए लोगो से; की भगवान् ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरा क्या दोष था?

ये एक मात्र घटना हो ऐसा भी नहीं है , मेरे घर से लगे हुए घर में सात वर्ष पूर्व जे ई मिश्र जी का परिवार रहता था……मिश्र जी , उनकी पत्नी, पुत्र ;पुत्र वधु और एक पोता दो वर्ष का. रात में कुछ लोगो ने सभी की बहुत ही वीभत्स तरीके से हत्या कर दी. मोहल्ले के श्रीवास्तव जी पेशकार. पत्नी प्राइमरी शिक्षिका , तीन बेटियां. हर साल माता का जगराता करते थे. खुश हाल परिवार. पहले आंटी कैंसर की वजह से चल बसीं फिर किसी प्रकार एक लड़की के हाथ पीले करके श्रीवास्तव जी लिवर ख़राब करके उनके पीछे हो लिए. सारी जमा पूँजी बीमारी में लग गयी और बाकि बची दो लड़कियां रिश्तेदारों की दया पर.तब आप बरबस ही कह उठते हो की भगवान् आप ने ये क्या कर दिया? ” नाम चतुरानन पै चुकत चले गए.” अरुण जी ने भी एक ऐसी ही घटना का उल्लेख किया है; जिसे की संछेप में मै यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.

स्पेस्टिक्स सोसाइटी स्कूल दिल्ली, बाबा आमटे का ईश्वर पर व्याख्यान और आलोक पूछ पड़ा ” लेकिन आपके ईश्वर ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?” आलोक, चल फिर नहीं सकता, हाथ – पैरों के सहारे घिसटना पड़ता था उसे; उसकी बोली समझना मुश्किल था. और भी सैकड़ों दिक्कतें. पर हौसला मजबूत. बाबा आमटे ने एक प्रसंग के द्वारा उत्तर दिया……..गांधी जी के एक सहयोगी की पुत्री विकलांग मंदबुद्धि थी. एक रोज़ क्वाटर में पहुचने पर उसने बेटी को अत्यंत कस्ट में देख कर उसे उठाया और ले जा कर गांधी जी की गोद में लगभग पटक ही दिया, ” आपके भगवान् ने ऐसा क्यों किया” वह चीखा. क्षण भर बाद गांधी जी ने शांत भाव से धीरे से कहा” भगवान् ने यह तुम्हारे ह्रदय में दयालुता पैदा करने के लिए किया है.”

सभी लोग प्रभावित हुए, पर आलोक नहीं.उसने कहा ” लेकिन अगर आपका भगवान् मेरे माता पिता को दयालु बनाना चाहता था तो भी उसने मेरे ही साथ ऐसा क्यों किया?” .इस प्रश्न का उत्तर बाबा आमटे को मिला या नहीं मै नहीं जानता……………अरुण जी लिखते है की बाद में वो जब भी बाबा जी से मिले उन्होंने कहा की वो अभी भी उत्तर खोज रहे हैं. प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है मेरे लिए. ऐसा क्यों करता है वो ईश्वर?……….. क्या धरती के रंगमंच के नाटकों में अधिक रोचकता डालने के लिए जिसका की वो आनंद उठा सके? या की बाकि सभी में इस प्रकार की घटना से डर उत्पन्न करने के लिए ताकि हम सभी उसकी पूजा करें…………” भय बिनु होय ना प्रीती”……….पर इस अनंत ब्रम्हांड की अनंत आकाश गंगाओ के अनगिन सूर्यों में से एक के अदना से गृह के धूल से भी तुच्छ एक मानव से भक्ति प्राप्त करने की ऐसी लालसा हो सकती है क्या उस परम सत्ता में? क्या वो इतना स्वार्थी है ? कैसा पिता है वो जो अपने बच्चो को दुःख दे कर आनंदित होता है? सभी धर्म गोलमोल बातें करते हैं. मुझे इस बात का उत्तर नहीं मिल रहा अतः आप सभी से ब्लॉग के माध्यम से पूछ रहा हूँ…… शायद यही कुछ ऐसा मिल जाये जिससे मन को शांति मिले.

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 17, 2012

एक साधू ने पास आये हुए दो आदमियों में से पहले वाले से कहा की आज से पन्द्रह दिनों के बाद तुमको अशर्फियो से भरा हुआ एक घड़ा मिलेगा और दूसरे कों कहा की आज से ठीक पन्द्रह दिनों के बाद तुमको फांसी लग जायेगी …. पहले वाला यह सुन कर रिलेक्स होकर मौज मज़े में डूब गया और दूसरा भक्ति और ध्यान तथा दान धर्म करने लग गया …. पंद्रहवे दिन जब दोनों दोस्तों जंगल में जा रहे थे तो पहले वाले कों एक अशर्फी मिली और दूसरे वाले के पैर में कील चुभ गई ….. साधू बाबा की दोनों ही बाते झूठी निकल जाने पर दोनों ही दुबारा से उनके “दरबार” में हाज़िर हुए ….. तब उन्होंने पहले वाले से फरमाया की तुम्हारे कुकर्मो के कारण तुम्हारी किस्मत में लिखा हुआ एक घड़ा मात्र एक अशर्फी में बदल गया और दूसरे से कहा की तुम्हारे सद्कर्मो के कारण ही सूली शूल में बदल गई (इशारों कों अगर समझो – राज़ कों राज रहने दो ) http://krishnabhardwaj.jagranjunction.com/2012/06/17/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

चन्दन राय के द्वारा
June 16, 2012

अनूप जी, सायद वो सारे बच्चे special होते है , ख़ास ,इक दम ख़ास , जो सायद हर गम ,हर दुःख को सहने की क्षमता ,बुद्धि सब से ज्यादा रखते है , पर सायद हर चीज में कमी होती है ना, ठीक ये भी उसी तरह इश्वर की कारीगरी ,उसकी अक्षमता की कमी है , ये अहसाश दिलाता है मुझे तो की भगवान् भी=================

jlsingh के द्वारा
June 16, 2012

आदरणीय अनूप जी,नमस्कार ! ऐसे अनेकों उदहारण मेरे पास भी है .. उत्तर मालूम नहीं. हमारे दिनेश भाई बहुत दिनों से इसे उत्तर की तलाश में हैं .. और मैं क्या कहूं ?

June 16, 2012

बहुत खूब लिखा जनाब………………शायद आपके सवालों के कुछ जवाब इस आलेख में मिल जाए… http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/24/%E0%A4%88%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%9C%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A5%A7/ और जिसका जवाब इस कड़ी में नहीं मिल पाया हो अगली कड़ी का इन्जार कीजिये……………..!

akraktale के द्वारा
June 13, 2012

अनूप जी नमस्कार, कई बार मुझे भी लगता है मेरे साथ ही क्यों? जब तक हम इसके साथ इश्वर को जोड़ेंगे तो हम इसी प्रकार भ्रमित होते रहेंगे. जबकि यह तो नियति का विधान है किसी के साथ भी ऐसी घटनाएं हो सकती है.इसके लिए किसी को दोष देने का अर्थ नहीं है. एक उदाहरण इस तरह का मेरे पास भी है. एक हमारे अधिकारी थे. कभी किसी का आर्थिक नुक्सान नहीं किया, कभी किसी को अकारण घर से दूर नहीं किया. सबकी समस्या पर रहम दिली से काम किया. किन्तु उनके चार बच्चो दो बेटे दो बेटियाँ सभी की अच्छी जगह शादियाँ कर दी. उनकी छोटी बेटी पति और एक बच्चे सहित सड़क किनारे एक ट्रक एक पलटने से ख़त्म हो गए सदमा लगा उनको उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया कुछ जी दिनों बाद छोटे लड़के की दुर्घटना में म्रत्यु हो गयी, यह सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सके और चल बसे उनकी बड़ी लड़की इस सदमे से दिमागी संतुलन नहीं रख पा रही है आज करीब चार वर्ष हो गए हैं. और अब दो दिन पहले ही उनकी पत्नी जो चलने फिरने में कठिनाई महसूस करती थी दामाद में साथ कार में जा रही थी एक ट्रक से एक्सीडेंट के कारण हाथ पैर की हड्डी तुडवा बैठी. अब इसे क्या कहेंगे?

    dineshaastik के द्वारा
    June 14, 2012

    अनूप जी नमस्कार,  अशोक  जी की बातों से सहमत…..

nishamittal के द्वारा
June 13, 2012

अनूप पाण्डेय जी निश्चित रूप से आपके सवाल विचारणीय हैं परन्तु इनका उत्तर टेढा है .मुझको भी नहीं मिला

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 14, 2012

    श्रीमान अनूप जी…नमस्कार….. आदरणीय निशाजी के विचारों से हम भी सहमत………


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